देश की राजधानी दिल्ली के प्रसिद्ध प्रदर्शन स्थल जंतर-मंतर (Jantar Mantar) पर होने वाले धरने-प्रदर्शनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है। मामले की सुनवाई करते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने विरोध प्रदर्शनों के तौर-तरीकों और सार्वजनिक स्थलों के इस्तेमाल को लेकर कड़ी टिप्पणी की है।
CJI ने सुनवाई के दौरान क्या कहा? कोर्ट ने स्पष्ट किया कि विरोध प्रदर्शन करना नागरिकों का लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि कोई संगठन या समूह किसी विशेष सार्वजनिक स्थल पर अनिश्चितकाल के लिए अपना कब्जा जमा ले। इससे आम जनता और स्थानीय निवासियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है।
अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि सार्वजनिक संपत्तियों और सड़कों पर लगातार कब्जा करने से शहर की व्यवस्था बाधित होती है। न्यायपालिका यह सुनिश्चित करना चाहती है कि लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन का अधिकार भी सुरक्षित रहे और आम जनता के अधिकार भी प्रभावित न हों।
सार्वजनिक व्यवस्था और अधिकारों में संतुलन: सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित प्राधिकरणों और पक्षों को इस मामले में एक संतुलित और व्यावहारिक नीति तैयार करने का सुझाव दिया है, जिससे विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से हो सकें और शहर की व्यवस्था भी सुचारू रूप से चलती रहे। मामले पर आगे की सुनवाई जारी है।